Search This Blog

Saturday, March 2, 2013

उलझन


मैं जब ख़ुदा के घर से चला था
तो उसने मुझे एक पैग़ाम दिया था
वो पैग़ाम तुम्ही लोगों के लिए दिया था
लेकिन तुमने
बिना सुने ही
मुझ पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया
तुम इतना चीख़े-चिल्लाए बिला-सबब कि
मैं कुछ कहता भी तो तुम क्या सुन सकते थे।

अब मैं सोच रहा हूँ
वापस जाऊँ तो कौन-सा मुहँ लेकर जाऊँ
ख़ुदा कहेगा
मेरा पैग़ाम दिया क्यों नहीं।  

No comments:

Post a Comment